बजट २०१६-१७

वित्तमंत्री श्री अरुण जेटली जी ने २०१६-१७ का बजट पेश किया। पूरा भाषण नीचे दिए गए लिंक में उपलब्ध है।

२०१६-१७ का पूरा बजट भाषण पीडीएफ फार्मेट में

२०१६ -२०१७ बजट का ग्रामीण क्षेत्र के लिए योगदान

कृषि और किसान कल्‍याण मंत्रालय का – वर्ष 2016-17 के बजटीय प्रावधान से स्पष्ट है कि मोदी सरकार की प्रतिबद्धता गाँव, गरीब, किसान है | कृषि और किसान कल्‍याण के लिए 35,984 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। किसानों की आय को आगामी 5 वर्षों में दोगुना करना हमारा लक्ष्य है, प्रति इकाई उपज बढाना, किसानों के लिए उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना, पशुधन-डेयरी एवं मत्स्यिकी  के अलावा कृषि शिक्षा अनुसंधान एवं कृषि विस्तार को बढावा देना हमारी प्रतिबद्धता है|

  • ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ को मिशन मोड में लागू किया जाना है। सिंचाई के अधीन 28.5 लाख हैक्‍टेयर क्षेत्र लाया जाएगा जिसके लिए इस 2016-17 के लिए 5717 करोड़ का आवंटन है, जिसमें कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय को 2015-16 कि तुलना में 1550 करोड़ के बदले 2340 करोड़ है जो 51 प्रतिशत कि वृद्धि है इसके अतिरिक्त इस वर्ष नाबार्ड के माध्यम से लगभग 20000 करोड़ का सिंचाई फण्ड सृजित करने का फैसला किया गया है तथा वृहत एवं मध्यम सिंचाई योजना (एआईबीपी) के तहत 89 सिंचाई परियोजनाओं, जो काफी समय से अपूर्ण रही हैं, का त्‍वरित कार्यान्‍वयन किया जायेगा। इससे 80.6 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र की सिंचाई करने में सहायता मिलेगी। इसके लिए अगले 5 वर्षों में 86500 करोड़ रूपये की आवश्‍यकता होगी जिसमें से वर्ष 2016-17 के लिए 12517 करोड़ रूपए के माध्‍यम से जल संसाधन मंत्रालय द्वारा 23 योजनाएं पूरी की जाएंगी। साथ ही मनरेगा के तहत वर्षापोषित क्षेत्रों में 5 लाख फार्म तालाबों और कुओं की व्यवस्था होगी |

कृषि उन्नति योजना –

(a)       मृदा स्वास्थ्य कार्ड और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन यह ऐसी स्कीम है जिसमें सरकार विशेष ध्यान दे रही है इस स्कीम को वर्ष 2015-16 में 142 करोड़ रूपये की तुलना में कुल 362 करोड़ रूपये आवंटित किया गया है, यह 155 प्रतिशत की वृद्धि है | मंत्रालय मार्च 2017 तक देश के सभी 14 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए समर्थ हो जाएगा | साथ ही उर्वरक कम्पनियों के 2 हजार मॉडल खुदरा केन्द्रों को अगले 3 वर्ष में मृदा और बीज परीक्षण सुविधाएँ मुहैया करायी जायेंगी | देश के सभी 643 कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि विश्वविद्यालयों एवं आइसीएआर के संस्थानों में मृदा परिक्षण हेतु मिनी लैब की स्थापना की जा रही है| साथ ही पैक्सों एवं किसान समूहों को 2000 मिनी लैब की स्थापना हेतु 80 प्रतिशत की राजसहायता देने का भी निर्णय किया गया है|

(b)       उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए जैविक मूल्य श्रंखला विकास हेतु तीन वर्षों के लिए 400 करोड़ रूपये का आवंटन वर्ष 2015-16 में हुआ था, यह 125 करोड़ रूपये के आवंटन के साथ वर्ष 2015-16 में शुरू की गयी जैविक कृषि स्कीम को आगे बढाने में सहायता करेगा | शेष 275 करोड़ रूपये अगले वर्ष (2016-17 एवं 2017-18) की परियोजना की आवश्यकता को पूरा करेगी | साथ ही मनरेगा के तहत जैविक खाद के उत्‍पादन के लिए 10 लाख कम्‍पोस्‍ट गड्ढ़ों का निर्माण किया जाएगा।

(c)        जैविक खेती के विकास के लिये पारंपरिक कृषि विकास योजना महत्वपूर्ण है और 297 करोड़ रूपये की केंद्र सरकार के कुल आवंटन के साथ व्यापक जैविक कृषि स्कीम है जो वर्ष 2015-16 के आवंटन 250 करोड़ रूपये के आवंटन से 19 प्रतिशत बढ़ी है |

(d)       समेकित कृषि विपणन स्कीम– ग्रामीण भण्डारण को बढ़ावा देने हेतु चालू बजट के दौरान अतिरिक्त संसाधन प्रदान की गयी है, आवंटन को वर्ष 2015-16 में 750 करोड़ रूपये से बढाकर चालू वर्ष में 788 करोड़ रूपये कर दिया गया है जो 5 प्रतिशत तक बढ़ा है |

(e)        राष्ट्रीय कृषि एवं प्रोद्योगिकी मिशन(एनएमएईटी)-सरकार राज्य सरकारों को उनकी कृषि विस्तार मशीनरी के सुदृढीकरण करने में सहायता देकर प्रोद्योगिकी के अंतरण को अपेक्षित महत्व दे रही है | कृषि विस्तार मिशन के लिए बजटीय आवंटन वर्ष 2015-16 में 598 करोड़ रूपये की तुलना में 635 करोड़ रूपये है जो 6 प्रतिशत की वृद्धि है | इसके अतिरिक्त अलग से कृषि सूचना प्रणाली के सुदृढीकरण/संवर्धन के लिए 40 करोड़ रूपये का आवंटन हुआ है|

(f)         राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन(एनएफएसएम)-विभिन्न फसलों की उत्पादकता बढाने के लिए सरकार वचनबद्ध है और देश की खाद्य सुरक्षा के योगदान बजटीय आवंटन से देखा जा सकता है | वर्ष 2015-16 में 1137 करोड़ रूपये के मुकाबले चालू वर्ष के 1700 करोड़ रूपये का आवंटन है | यह वर्ष के लिए 50 प्रतिशत बढ़ी है एवं दलहन के लिए 500 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गयी है |

(g)       राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन(एनएमएसए)-सरकार बजटीय आवंटन से स्पष्ट रूप से सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए वचनबद्ध है एनएमएसए जिसे वर्ष 2015-16 में 730 करोड़ रूपये का आवंटन किया गया था अभी इसे 1062 करोड़ रूपये दिए गये हैं जो 45 प्रतिशत अधिक है |

 

  • राष्ट्रीय कृषि मंडी(एनएएम) के माध्यम से मंडी सुधार-सरकार का ऐसा मानना है कि उद्धोग जैसे अन्य क्षेत्रों की तुलना में कृषि क्षेत्र में कम सुधार उपाय किये गये हैं इसलिए सरकार कृषि क्षेत्र में विपणन को अत्यन्त महत्वपूर्ण समझती है और सरकार राष्ट्रीय कृषि मंडी की स्थापना के लिए वचनबद्ध है | 12 राज्यों ने एपीएमसी एक्ट में सुधार कर लिया है पंजाब को छोड़कर सभी राज्यों ने सहमति दे दी है| सरकार दिनांक 14 अप्रैल 2016 को स्कीम की शुरुआत करेगी तथा सितम्बर 2016 तक 200 मंडियों तथा मार्च 2017 तक और 200 मंडियों को इस स्कीम के तहत कवर किया जाएगा अर्थात मार्च 2017 तक कुल 400 मंडियों को कवर किया जाएगा, मार्च 2018 तक देश में 585 एपीएमसी को कवर करने का लक्ष्य है |
  • ऋण प्रवाह को बढ़ाकर 9 लाख करोड़ किया गया है जो 2015-16 में 8.50 लाख करोड़ था।

o       किसानों पर ऋण अदायगी के बोझ को कम करने के लिए, ब्‍याज सहायता हेतु बजट अनुमान 2016-17 में 15,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो कि 2015-16 में 13,000 करोड़ था।

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आबंटन 5,500 करोड़ रुपये किया गया है जो पिछले बजट में 3185 करोड़ रूपया था। इस प्रकार इस मद में लगभग 73 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जिसके लिए 2015-16 में 3900 करोड़ का प्रावधान था, इस बार 2016-17 के बजट में 5400 करोड़ का प्रावधान किया गया है| 38 प्रतिशत की वृद्धि गयी है |
  • राष्ट्रीय कृषि वानिकी कार्यक्रम हेतु पहली बार बजट में 75 करोड़ केन्द्रांश का प्रावधान किया गया है इससे मेड पर पेड़ अभियान को गति मिलेगी|
  • पशुपालन, डेयरी एवं मत्‍स्‍यपालन के लिए वर्ष 2016-17 में 1600 करोड़ आवंटित किए गए जो 2015-16 में 1491 करोड़ रुपये था।
  • अलग से चार नई परियोजनाओं – ‘पशुधन संजीवनी’ ‘नकुल स्‍वास्‍थ्‍य पत्र’, ई-पशुधन हाट  और राष्‍ट्रीय देशी नस्‍ल जेनोमिक केन्‍द्र के लिए 850 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
  • वर्ष 2015-16 में डेयर/भाकृअप को 5387.95 करोड़ रूपये की कुल वित्‍तीय संसाधन प्रदान किए गए जबकि वर्ष 2016-17 में इसमें पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत वृद्धि के साथ 6309.89 करोड़ रूपये के वित्‍तीय संसाधन उपलब्‍ध कराये गए। जिससे शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार को गति मिलेगी।
  • कृषि विज्ञान केन्‍द्रों की प्रभावशीलता और प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए 50 लाख रूपये  की कुल पुरस्‍कार राशि के साथ 643 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के बीच एक राष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

 

गांव एवं किसान हित की अन्‍य योजनायें

  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत आबंटन बढ़ाकर 19,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है जो विगत वर्षों में जारी की गई राशि का लगभग दोगुना है। वर्ष 2019 तक शेष 65,000 पात्र बस्‍तियों को सड़कों से जोड़ा जाएगा।
  • सूखाग्रस्‍त और ग्रामीण आपदा से ग्रस्‍त प्रत्‍येक ब्‍लॉक दीनदयाल अन्‍त्‍योदय मिशन के तहत विशिष्‍ट ब्‍लॉक के रूप में काम किए जाएंगे। इस योजना में सरकार द्वारा सघन रूप से स्‍वयंसहायता समूह का गठन किया जाएगा जिन्‍हें विभिन्‍न विधाओं में प्रशिक्षण (Training) दी जाएगी।साथ ही मनरेगा के तहत कलस्‍टर सुविधा टीमों का भी गठन किया जाएगा जो जल संरक्षण औरप्राकृतिक संसाधनों के प्रबंध को सुनिश्‍चित करेगी। इन जिलों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना केतहत भी प्राथमिकता दी जाएगी।
  • गांवों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी (ररबन) मिशन की शुरुआत। इसके तहत 300 ग्रामीण शहरी कलस्‍टरों का विकास किया जाएगा जिसमें किसानों केलिए आधारभूत संरचना जैसे कृषि प्रसंस्‍करण, कृषि बाजार को सुलभ कराना, गोदाम एवं वेयरहाउसोंको बनाना है। इसके अतिरिक्‍त इन ग्रामों में स्‍वच्‍छता अभियान, पाईप-जलापूर्ति (Water Supply),ठोस और तरल जल प्रबंधन (Solid & Liquid Water Management), गली-नालियों कापक्‍कीकरण, Streets Light, शैक्षणिक संस्‍थाओं का सुदृढ़ीकरण एवं अन्‍य गांवों से अंतर्ग्रामीणसम्‍पर्क का विकास, सड़क सुविधा, एलपीजी गैस के Connection एवं Mobile Health Unit केमाध्‍यम से स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को भी इन गांवों तक पहुंचाया जाएगा।
  • 1 मई, 2018 तक 100 प्रतिशत ग्राम विद्युतीकरण।
  • 655 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ राष्‍ट्रीय ग्राम स्‍वराज अभियान नामक एक नई स्‍कीम।
  • अस्‍पताल व्‍यय से बचाव के लिए स्‍वास्‍थ्‍य बीमा स्‍कीम। नई स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा स्‍कीम प्रत्‍येक परिवार को एक लाख रूपये तक स्‍वास्‍थ्‍य बीमा प्रदान करेगी। इसके तहत वरिष्‍ठ  नागरिकों को 30,000 रुपये तक अतिरिक्‍त टॉप-अप पैकेज का प्रावधान होगा।
  • बीपीएल परिवारों के लिए रसोई गैस कनेक्‍शन सुविधा। इसके लिए इस बजट में 2000 करोड़ रुपये की व्‍यवस्‍था की गई है। इससे 2016-17 में लगभग 1 करोड़ 50 लाख बीपीएल परिवारों को लाभ मिलेगा।
  • आधार मंच को सांविधिक समर्थन प्रदान करना, जिससे पात्र लोगों तक लाभों की पहुंच सुनिश्‍चित की जा सके।
  • वर्ष 2016-17 मनरेगा के लिए 38,500 करोड़ रुपये की राशि का आवंटन किया गया है।
  • अनुसूचित जाति, जनजाति तथा महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने स्‍टैंड अप इंडिया स्‍कीम को मंजुरी दे दी है। इस प्रयोजन के लिए 500 करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराए गए हैं।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के जरिए उद्यमिता को युवाओं के दरवाजे पर लाना  चाहते हैं। हमने देश भर में 15,000 बहु-कौशल प्रशिक्षण संस्‍थाओं, की स्‍थापना करने का निर्णय लिया है। इन कार्यक्रमों के लिए 17000 करोड़ रुपये की राशि अलग रखी जा रही है।
  • वर्ष 2016-17 में सड़कों और रेलवे संबंधी कुल खर्च 2,18,000 करोड़ रुपये होगा।
  • प्रधानमंत्री की जन औषधि योजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 में जेनरिक दवाओं की आपूर्ति करने के लिए 3,000 स्‍टोर खोले जाएंगे।
  • अल्‍पसंख्‍यकों के कल्‍याण तथा कौशल विकास के लिए ‘उस्‍ताद’ स्‍कीम का कारगर कार्यान्‍वयन किया गया है।
  • शिक्षा प्रक्षेत्र की आवश्‍यकता को ध्‍यान में रखते हुए 62 नए नवोदय विद्यालय खोले जाने के लिए योजनाएं हैं।
  • डॉ. बी.आर. अम्‍बेडकर की 125वीं जयंती के इस वर्ष में उद्योग संघों के साथ भागीदारी  करके सूक्ष्‍म, लघु, मध्‍यम उद्योग मंत्रालय में राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति केन्‍द्र बनाने का प्रस्‍ताव है।
  • छोटे कामगारों के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्‍यम से 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये के ऋण देने का लक्ष्‍य है। पिछले वर्ष के बजट में इस योजना में 1 लाख करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया था।

सौ. से: पीआईबी