महिला सशक्तिकरण, कुटिर उद्योग की सफलता और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद का बेहतरीन उदाहरण ‘लिज्जत’ पापड

रंक से राजा बनने की कहानी सुनना हर व्यक्ति को पसंद होता है और संकल्प सिद्ध कर विजय वरण की कहानी सुनना हर किसी को अच्छा लगता है। श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की कहानी कुछ इससे भी बढ़कर है।

आज लिज्जत देश भर के घरों में ‘पापड़’ के सामानार्थी हो चुका है। अस्सी रुपये के छोटे से ऋण से शुरू हुआ ये सफर आज 301 करोड़ रुपये तक की सालाना बिक्री तक पहुंच चुका है। इसकी आश्चर्यजनक सफलता से भी बढ़कर इसकी चकित कर देने वाली सादगी ज्यादा ध्यान आकर्षित करती है और यही वो गूढ़ है जिसे कोई भी प्रबंधक श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ से सीख सकता है।

पिछले चालीस सालों से अपने बुनियादी सिद्धांतों से चिपके हुए लिज्जत ने ये सुनिश्चित किया है कि हर प्रक्रिया संतुलित तरीके से संचालित हो, सदस्य संतुलित लाभ अर्जित करें, एजेंट को उनका उचित हिस्सा मिले, उचित मूल्य पर उपभोक्ता गुणवत्तापूर्ण सामान पाए और विभिन्न मुद्दों पर कंपनी की ओर से दिए जा रहे डोनेशन से समाज को लाभ हो।

ये सब कैसे संभव हुआ आखिर ? लिज्जत पापड़ का अब तक का ये सफर दिखाता है कैसे गांधीवादी सरलता को अपने सभी गतिविधियों का मूल मंत्र बनाया जा सकता है।

शुरूआत

lijjat 515 मार्च 1959 की गर्मियों की दोपहर में जब साफ आसमान में सूरज अपनी चमक बिखेर रहा था। दक्षिणी मुंबई के एक भीड़ भाड़ वाले इलाके गिरगोम के एक पुराने आवासीय इलाके में महिलाएं अपनी घरेलू दिनचर्या में व्यस्त थी। उनमें से सात महिलाएं एक घर की छत पर जमा हुईं और छोटे से आयोजन को अंजाम दिया। सात महिलाएं उस दोपहर छत पर जो काम कर रही थीं उसका अंजाम चार पैकेट पापड़ के रूप में सामने आया और सामने आया एक संकल्प की ये काम वो करती रहेंगी। सात महिलाओं की इसी अग्रणी समूह ने इस काम को आगे बढ़ाने का संकल्प उठाया।

जैसे जैसे दिन आगे बढ़ता गया सात महिलाओं के इस समूह में महिलाओं की संख्या भी बढ़ती गई और एक संस्थान के आगे बढ़ने की शुरूआत हुई। आरंभिक दिन आसान नहीं थे। संस्था के सामने कई बार कठिन चुनौतियां भी आईं। अपने काम को शुरू करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे, उन्होंने अपना काम 80 रुपये के कर्ज से शुरू किया।

आत्मनिर्भरता उनकी नीति का अनिवार्य हिस्सा था और उन्हें दान में पैसा लेना स्वीकार्य भी नहीं था। इस तरह पेशेवर तरीके से व्यवसायिक स्तर पर काम की शुरूआत हुई। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाते हुए उन्होंने उत्पादन शुरू किया जो सफलतापूर्वक एक संगठन के तौर पर खड़ा हो चुका है औऱ आगे बढ रहा है।

lijjat 2श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ महिलाओं का एक संगठन है जो पापड, अप्पालम, मसाला, गेंहू आटा, चपाती, कपड़ा धोने का सासा पाउडर, कपड़ा धोने का सासा साबुन, और लिक्विड  डिटरजेंट आदि उत्पाद तैयार करती है। मुंबई में केंद्रीय कार्यालय के साथ ही ये संगठन देश भर में अपने 81 शाखाओं और 27 डिविजनों के साथ भारत के सभी राज्यों में फैला हुआ है। सात बहनों से शुरू हुआ ये सफर आज देश भर में 43 हजार बहनों तक फैल गया है। संस्थान अपनी बहनों की कठिन मेहनत से लगातार आगे बढ़ रहा है जो कठिन से कठिन समय में महिलाओं की शक्ति पर विश्वास करते हुए आगे बढता जाता है।

संस्थान के सफर में पहला महत्वपूर्ण पड़ाव 1966 में तब आया जब संस्था को बांबे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत और सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकरण प्राप्त हुआ और खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग ने कुटीर उद्योग के तौर पर संस्थान को मान्यता दी।

lijjat 3संस्था का मकसद महिलाओं को रोजगार देना और अच्छी आय के जरिए सम्मानित आजीविका उपलब्ध कराना है। कोई भी महिला किसी भी जाति, वंश या रंग की जो संस्थान के मूल्यों और मकसद के साथ खुद को खड़ा करती है, उस दिन से ही इस संस्थान की सदस्य हो जाती है जिस दिन वो यहां काम की शुरूआत करती है। अल्लसुबह साढ़े चार बजे पापड़ उत्पादन का काम शुरू होता है। उद्योग समिति की एक मिनी बस महिलाओं को उनके घर से सुबह सुबह लेकर फैक्ट्री तक लाती है और काम के बाद उन्हें उनके घर तक छोड़ भी आती है।

प्रत्येक शाखा का नेतृत्व एक संचालिका करती है जो उस शाखा के उत्पादन की देख रेख करती है। देश भर में फैली इन शाखाओं के संचालन के लिए 21 सदस्यों वाली एक केंद्रीय प्रबंधन समिति करती है जिसमें एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, दो सचिव और दो कोषाध्यक्ष सहित छह निर्वाचित अधिकारी होते हैं।

सभी शाखाएं स्वायत्त इकाइयां हैं और अपने उत्पादन की लाभ या हानि का स्वयं ही प्रबंधन करती हैं। अधिक लाभ होने की स्थिति में सदस्य महिलाएं अपनी आय को उसी अनुपात में बांट लेती हैं हानि को भी इसी तरीके से आपस में शेयर किया जाता है। समूह की महिला सदस्यों अपनी कड़ी मेहनत और निरंतर सर्तकता के साथ लिज्जत पापड़ की गुणवत्ता को बनाए रखती हैं। गृह उद्योग समिति अपने उत्पाद को देश में ही नहीं बल्कि, ब्रिटेन, अमेरिका, मध्य पूर्व के देशों, थाइलैंड, सिंगापुर, हांगकांग, हॉलैंड, जापान, अस्ट्रेलिया जैसे कई अन्य देशों में निर्यात भी करती है।

lijjat 4लिज्जत अपनी सदस्य बहनों की बच्चों को दसवीं और बारहवीं परीक्षा पास करने के बाद स्कालरशिप  भी प्रदान करती है ताकि उन महिला सदस्यों को अपने बच्चों की उंची शिक्षा के बोझ को साझा किया जा सके। संगठन की कार्यशैली और उनके उत्पाद की गुणवत्ता को खादी एवं कुटीर उद्योग आयोग ने साल 1998-99 और साल 2000-01 में सर्वोत्तम कुटीर उद्योग के अवार्ड से भी सम्मानित किया है। यही नहीं कॉरपोरेट एक्सीलेंस के लिए साल 2002 का इकानॉमोकि टाइम्स का बिजनेसवुमन ऑफ द इयर अवार्ड भी मिला। साल 2003 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सर्वोत्तम कुटीर उद्योग के सम्मान से संस्था को सम्मानित किया। 2005 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने दिल्ली के विज्ञान भवन में संस्थान को ब्रांड इक्विटी अवार्ड से भी सम्मानित किया। भारत के उपभोक्ताओं ने 2010-11 में लिज्जत पापड को पॉवर ब्रांड के रूप में चयनित किया जिसका सम्मान संस्थान को नई दिल्ली में प्रदान किया गया।

श्री महिला गृह उद्योग समिति को उनके इस अभिनव सफल प्रयोग और गुणवत्ता पूर्ण उत्पाद के लिए देशी विदेशी अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। देश  दुनिया के तमाम मीडिया संस्थानों ने लिज्जत के इस प्रयोग को अपने अपने मंचों पर जगह दिया है। सालों से संस्थान अपने बेहतरीन कार्यों के जरिए देश की महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ रहा है। लिज्जत ने इन महिलाओं को समाज में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने और सम्मान से जीने का अवसर प्रदान किया है।

साभार: इफको लाइव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2 × one =