अच्छे मॉनसून से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4 फीसदी रहने का अनुमान

rain in north india
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इस साल देश में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4 फीसदी रह सकती है। यह अनुमान इस उम्मीद पर टिका है कि अब तक बारिश सामान्य रही है और शेष अवधि में मॉनसून सरप्लस रहेगा। सूखे के चलते पिछले दो साल में कृषि क्षेत्र की वृद्धि कमजोर रही। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत धीमी रही। जून के अंत तक कुल बारिश सामान्य से 12 फीसदी कम थी। उसके बाद इसमें तेजी आई और सोमवार तक यह सामान्य से महज 1 फीसदी कम थी। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि अब तक देश 36 सब-डिविजन में से 28 यानी देश के 73 फीसदी हिस्से में सामान्य से अत्यधिक बारिश हुई है। पूर्व और उत्तर पूर्व को छोड़कर सभी क्षेत्रों में बारिश सामान्य या उससे अधिक रही है। गौरतलब है कि उत्तर-पूर्व देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 16 फीसदी योगदान देता है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल में मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, ‘मॉनसून सामान्य रहने के आधार पर हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2017 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि 7.9 फीसदी और कृषि क्षेत्र की वृद्धि 4 फीसदी रहेगी। ग्रामीण खपत में सुधार के आसार हैं, जिससे निजी खपत बढ़ेगी। इससे क्षमता उपयोग बढ़ेगा और वित्त वर्ष के अंत तक निवेश चक्र शुरू हो जाएगा।’ पिछले साल कृषि क्षेत्र की वृद्धि 0.2 फीसदी थी। पिछले कुछ सप्ताह में ज्यादातर फसलों की बुआई में तेजी आई है। यह पिछले साल से करीब 2 फीसदी अधिक है। पिछले दो वित्त वर्ष में सामान्य से कम मॉनसून का कृषि उत्पादन पर असर रहा है।  2015 के तीसरे अग्रिम अनुमान में चावल का उत्पादन 2 फीसदी, मोटे अनाजों का 12 फीसदी, दालों का 0.5 फीसदी, गन्ने का 4 फीसदी और तिलहन उत्पादन 6 फीसदी घटाया गया। पिछले दो साल में कृषि वृद्धि दर औसतन 0.4 फीसदी रही, जो 3 फीसदी के दीर्घकालिक औसत से काफी कम है।
क्रिसिल का अनुमान है कि ग्रामीण मांग बढऩे से उपभोग आधारित क्षेत्रों को फायदा मिलेगा। इनमें वाहन विशेष रूप से दोपहिया वाहन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शामिल हैं। जोशी ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि सकारात्मक माहौल यानी अच्छे मॉनसून एवं बेहतर वितरण और पिछले साल के कमजोर आधार से कृषि क्षेत्र की वृद्धि 6 फीसदी तक पहुंच सकती है, जिससे जीडीपी की वृद्धि दर 8 फीसदी का स्तर पार कर सकती है। महंगाई को लेकर हमारा अनुमान है कि भरपूर खरीफ उत्पादन से आपूर्ति बढ़ेगी और खाद्य महंगाई कम होगी। हमारा मानना है कि इस वित्त वर्ष में सीपीआई आधारित महंगाई औसतन 5 फीसदी रहेगी।

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